शत्रु का सपना

एक सैनिक था खड़ा सामने बरखोरदार बिना पहचाने
हम भारत को कब्जाएंगे सबको सपना लगे सुनाने

इतना सुनते ही सैनिक ने मार दिया इक जोड़ का थप्पड़
दिया चुनौती वहीं से दुश्मन को आदित्य की कविता पढ़कर

वीर लहू से सिंचित भूमि रणवीरों की पूज्य धरा
अरि रक्त के स्वाद चखन की इस भूमि की परंपरा

इस भूमि का हर एक बेटा वीर भगत सिंह और आजाद
हर एक बेटी लक्ष्मीबाई, हजरत बेगम जिंदाबाद

सदियों से इस भूमि की तलवारें चलती आई है
चढ़ी भृकुटी वीरों की अरि की यमलोक विदाई है

यूं तो तुम्हे दिया है परिचय कई बार मैदानों में
तुम जैसे कचरे को साफ किया है सैन्य अभियानों से

पैसठ हारे इकहत्तर में लौटे थे पतलून उतार 
हुआ कारगिल युद्ध तो खाया था निन्यानबे में भी मार

दो हजार सोलह का सर्जिकल स्ट्राइक भूलो मत
उन्नीस के स्ट्राइक में जो लुटा लिए अपनी इज्जत

एक तो कुछ दिन पहले ही था हुआ ऑपरेशन सिंदूर 
जहां तुम्हारे लिए जहन्नुम रहा न तुमसे ज्यादा दूर

इतना पिटे हो चुल्लू भर पानी क्या तुम्हें नसीब नहीं
डूब मरो इतना हारे हो लगता तुम्हें अजीब नहीं

सपना अब भी सजा के बैठे भारत को कब्जाने का
छोड़ वहम को सुनो अहम एक बात है तुम्हें बताने का

जो दिन में सपना देख रहे हो ऐसी नींद सुला देंगे
सपने में ही खो जाओगे उठना ही तुम्हे भुला देंगे।

कब्जा करना है तो आओ रणभूमि की छाती पर
यदि तुम्हारा नाम न लिख दे फूंक से बुझी बाती पर

रणभूमि को रिपुओं का श्मशान न कर दे तो कहना
अरिसदन गर अरियों से वीरान न कर दे तो कहना

अगर तबाही मचा न दे जो दुश्मन के घर में घुसकर
अरि मुंड गर सजा न दे जो माँ रणचंडी को खुशकर

मातृभूमि की ओर बढ़ा पग काट न गर दे तो कहना
अंग अंग जो दसों दिशा में बांट न दे गर तो कहना

राष्ट्र की सुई बराबर भूमि पर भी यदि नजर डाली
कहना गर जो बिना शीश अरि धर न कर देंगे खाली

वह भूमि जो भीख में तुमको दान दिया सैंतालीस में
रंग देंगे पाक तिरंगे से गर नहीं मिनट पैंतालीस में

रावलपिंडी यदि जो जय जय हिंद न गाए तो कहना
पंद्रह अगस्त को पाक भी आजादी न मनाए तो कहना

तेरी ही भूमि से हम स्वामित्व मिटा देंगे तेरा
तू लांघ तो सरहद एक बार अस्तित्व मिटा देंगे तेरा

                           – आदित्य कुमार 
                                (बाल कवि)

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