धर्म पंथ में यही फर्क है
पंथ अलग है धर्म अलग है
पंथ अंगूठी व धर्म नग है
बिन नग ज्यों फिजूल अंगूठी
बिना धर्म के व्यर्थ पंथ भी
धर्म है करुणा धर्म दया है धर्म भावना धर्म हया है
धर्म है शक्ति धर्म है भक्ति धर्म है बुद्धि धर्म तर्क है
धर्म पंथ में यही फर्क है
पंथ मुझे वर्चस्व है लगता
महज दौड़ का अश्व है लगता
जो बस यह साबित करता है
मैं हूं तू है कौन बड़ा है
कितना ऊंचा कौन खड़ा है
पंथों में बस होड़ लगी है
इसलिए अंतर मात्र यही है
धर्म स्वर्ग है पंथ नर्क है
धर्म पंथ में यही फर्क है।।
- आदित्य कुमार
(बाल कवि)
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