गांव आना भूल जाओगे
शहरों ने केवल देखी है गांव के हरियाली को
लेकिन तुमने कब जाना है गांव की बदहाली को
इंस्टाग्राम या यूट्यूब देखकर भले शांत माहौल लगे
आओ कभी तो देखोगे यहां बात बात पिस्तौल चले
कई किताबों में लिखा है गांव में सौहार्द भरा है
पर सच्चाई सुनो यहां भाई के हाथों भाई मरा है
तुमने तो केवल बाहर से इनका निश्चल मन देखा है
मैने एक सफल व्यक्ति का पूरा गांव दुश्मन देखा है
अपनी खुशियों से खुश होते इनको सदियों बीत गए है
इनके मन में बस यह दुख है “फलने भैया जीत गए है”
यहां राजनीति का सबसे निचला घटिया रूप पाओगे
गांव आओ बस एक बार फिर गांव आना भूल जाओगे...
– आदित्य कुमार
(बाल कवि)
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