सिंहासन या श्मशान
युद्ध करो अधिकार के लिए
और अपने परिवार के लिए
शत्रु के संहार के लिए
एक सुखी संसार के लिए
युद्ध करो जब संकट में पड़ जाए मान सम्मान
जीत गए तो सिंहासन या मिट गए तो श्मशान।।
युद्ध नया जीवन देता है
शांति और अमन देता है
योद्धाओं को रण देता है
गरुड़ को ज्यों गगन देता है
युद्ध अलग न हो जीवन से योद्धा रखना ध्यान
जीत गए तो सिंहासन या मिट गए तो श्मशान।।
रणचंडी को रक्त चाहिए
वीरभद्र को भक्त चाहिए
रणरेणु लहू स्वक्त चाहिए
तुम्हे तुम्हारा तख्त चाहिए
मगर मिलेगा नहीं सहज करना होगा संग्राम
जीत गए तो सिंहासन या मिट गए तो श्मशान।।
कायर का जीवन है श्राप
जीवन भर का है संताप
डूब न जाओ शर्म से आप
बेहतर परिजन करे विलाप
योद्धाओं के लिए है जग में केवल दो स्थान
जीत गए तो सिंहासन या मिट गए तो श्मशान।।
कोई एक भी पाकर हो जाता है योद्धा महान
जीत गए तो सिंहासन या मिट गए तो श्मशान।।
- आदित्य कुमार
(बाल कवि)
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