अकेले

साथ चाहिए किसका तुमको 
काफी हो तुम स्वयं अकेले 
है तूफान से जन्म तुम्हारा 
तुम आंधी की गोद में खेले 

आस लगाकर तुम बैठे हो 
साथ किसी के पाने का 
मगर बताओ किसे है फुर्सत 
भला तुम्हे अपनाने का 

लक्ष्य तुम्हारा, डगर तुम्हारा 
शूल तुम्हारे है पथ पर
आस लगाकर तुम बैठे हो 
इन्हें हटा दे कोई आकर

मगर जान लो सभी व्यस्त है 
सबकी अपने मंजिल है
कोई ऐसा दानी मिलना 
इस युग में तो मुश्किल है

और प्रश्न है क्यों ही कोई 
राह तुम्हारा हल कर दे 
लक्ष्य तुम्हारा डगर तुम्हारा 
क्यों कोई दूजा शूल हरे

तुम स्वयं बढ़ो और याद रखो
कोई साथ किसी के न जाता
श्मशान, शिखर सिंहासन पे 
इंसान अकेला है आता।।

           - आदित्य कुमार 
               (बाल कवि)


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