गांधी - एक कसौटी
गाली देना बहुत सरल है गांधी को
लेकिन पाना बहुत विरल है गांधी को
सदियों तक निज नाम कसौटी कर जाए
नाम अमर कर ले चाहे खुद मर जाए
जीवन ऐसा जिए कि उदाहरण हो
पीढ़ी दर पीढ़ी जिसका उच्चारण हो
जिसके सिद्धांतों की लोग शपथ लेते
सत्य नाम का शस्त्र अहिंसा रथ लेके
आजादी की रणभूमि में हुआ खड़ा
हाड़ मांस का योद्धा अन्तों अंत लड़ा
लेकिन अपनों के ही हाथों मारे गए
"हे राम" कहा और मौत के घाट उतारे गए
कहे "महात्मा" जिसको कवि टैगोर
नेताजी "बापू" बोले सब ओर
"वन मैन आर्मी" जिसको बोले दुश्मन भी
किंतु जिसको लील गया निज आंगन ही
जिसको हुए शहीद बीत गए आठ दशक
अपने ही करते उसकी ग़ैरत पे शक
सारी दुनिया झुकती जिस गांधी के आगे
उसको गाली देते थकते नहीं अभागे।
– आदित्य कुमार
(बाल कवि)
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