कारगिल के 527

आओ आज तुम्हे कारगिल के बारे में कुछ बतलाता हूं,
भारत मां के लालो कि गाथा तुम्हे सुनता हूं,
कारगिल के इस युद्ध में कितने ही मौत की नींद सो गए थे,
नमन करता हूं उन सहीदो को जो मृत्यु को प्राप्त हो गए थे।

मीठी नींद को भूल गए कांटो के बीच वो सोए थे,
नमन करता हूं उन माओ को जिन्होंने बेटे खोए थे,
सुन एक एक सैनिक कि गाथा लिखते लिखते रोता हूं,
उन बेटों कि याद कहानी करते करते रोता हूं।

527 मृत्यु को पाए, वो सब अमर जवान हुए,
नमन करता हूं उन वीरों को जो कारगिल में कुर्बान हुए,
वो भारत के वीर जवान देवता के संग बैठे होंगे,
इन्द्रधनुष के छटाओं के बने रंग बैठ होंगे।


                                                - आदित्य कुमार

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