आखिर मैंने किया ही क्या?
लेके घूमेंगे मोबाइल फैशन वाले हम कहलाएंगे,
पप्पा का है पैसा जितना मन उतना उड़ाएंगे,
पप्पा मेहनत करते जाए हमको पैसे से है मतलब,
जब थक जाएगा शरीर तो पूछेगा कौन उन्हे अब।
ऐसी सोच जो रखते है वो शायद धरती के वासी ही नहीं,
उनको पैसों से मतलब है अपनों के वो अभिलाषी ही नहीं,
आईफोन अभी अभी आया है पप्पा डेढ़ लाख तुम देदो,
तुम चाहे मजदूरी करलो लेकिन पैसे कहीं से भेजो,
यहां पे पप्पा है परेशान कहां से लाए इतना पैसा,
उनको ये भी नहीं पता दिखने में आईफोन है कैसा,
बस बेटे के जिद्द पूरी करने को वो मजदूरी तक कर जाते है,
बूढ़े जब होते है पप्पा तो बोझ वहीं बन जाते है।
दुख काफी तब होता है बेटा असलियत जब दिखलाता है,
क्या किए हो मेरे खातिर बेटा जिस दिन पूछने आता है,
दिल की धड़कन रुक जाती है सीना तब कांप जाता है,
सुन के बेटे की ये बाते वो जीते जी मर जाता है,
मेरे पांव में कांटे भरे हुए फिर भी चप्पल तुझको देता था,
सुख सुविधा सब तुझको देता खुद सारे गम सह लेता था,
सब कुछ अपना देके तुझको आखिर मैंने दिया ही क्या,
है शर्म मुझे खुद पे आती कि आखिर मैंने किया ही क्या।
- आदित्य कुमार
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