प्रकृति की शक्ति
काम सभी दानव के है खुद को मानव बतलाते हो,
प्रकृति को कैसे नाश करे ये सीखते और सिखाते हो,
अपने घर के खातिर दुष्टों पेड़ों को काट डालते हो,
बाहर से दिखते हो मनुस्य अंदर शैतान को पालते हो।
दांत के खातिर हाथी को खालो के खातिर बाघो को,
तुम तोड रहे हो बड़े प्रेम से प्रकृति के कच्चे धागों को,
कहते है मानव अपने स्वार्थ के खातिर सब कुछ करते है,
फिर शुद्ध हवाओं के निर्माता पेड़ ऐसे क्यों मरते है।
नाश कर के प्रकृति का तुम बसा रहे हो अपना शहर,
लेकिन मत भूलो तुम से भी भयंकर है प्रकृति का कहर,
कौन है उससे शक्तिशाली जो तुम जैसों को पाल सकती है,
मत भूलो वो तुम जैसों को तबाह करने की शक्ति रखती है।
सब काम ग़लत करते जाते पहन के अच्छाई का माला,
जब से इन्सान ने जन्म लिया प्रकृति का कचरा कर डाला,
अब भी संभलो ये धरती है तुम्हारी है तुम्हारा ये कण कण,
करके नाश प्रकृति का तुम ख़तम कर रहे हो अपना जीवन।
- आदित्य कुमार
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