हाथ पिता का आंचल मां का
मेरे कलम आज आए है मां पापा के चरणों में,
मेरे निर्माता मेरे पालनहार सोचा कुछ लिख दूं मेरे ईश्वर पे,
जिसके सर पे हाथ पिता का उसकी कष्टों से दूरी है,
जीवन सुखमय जीने को मा का आंचल सदा जरूरी है,
जो भूला पिता का प्यार वो जीवन भी मृत्यु सा जीता है,
जो भूला बूढ़ी मा को वो अमृत भी जहर सा पीता है,
जो भूल गया की मातृ पितृ के चरणों में चारो धाम बसे,
केवल वो दुख से घिरा रहे सुख से वो अनजान रहे,
दुनिया में कुत्ते भी उसको थुकों से नहलाते है,
जो बेटे मां बाप को अपने वृद्धाश्रम रख आते है,
जिस मां बाप ने तुमको इस लायक आज बनाया हैं,
आगे चल आश्रम मे छोड़ो क्या सपना यही सजाया है?,
जो कदर भूल गए इनका उनसे इश्वर भी रखते दूरी है,
घर के बरकत खुशहाली खातिर बूढ़े मां बाप जरूरी है,
जिन्होंने तुमको बड़ा किया उनका सपना मत चूर करो,
हाथ जोड़ के विनती है मां बाप को कभी ना दूर करो।।
- अदित्य कुमार
"बाल कवि"
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