मानव बन जाओगे--

ऐसे घुट घुट के बताओ तुम मरोगे यूं ही कब तक,
ईमान बिन संघर्ष बिन तुमने जीवन जिया है अब तक,

कोशिश करो करते रहो एक बार देखो जिके जीवन,
जिस दिन सच मुच मे जिओगे उस दिन तृप्त होगा ये मन,

एक शांति महसूस होगी, चैन भी मिल जाएगा,
ईमान से जिएगा जब उस दिन मानव कहलायेगा,

देर हो अंधेरे हो पर हर वक्त एक शुरुआत हो,
मन में जो हो ईमान तो इश्वर भी तेरे साथ हो,

कोशिश जड़ा कर के देखना एकदम सफल हो जाओगे,
जिस दिन संघर्ष से जिओगे उस दिन मानव कहलाओगे,

सुकुं मिलेगा प्राणों को, मन भी तुम्हे सराहेगा,
एक बार कर के देख सच में मानव बन जाएगा,

कोयला भी होगे तो कोहिनूर सा बन जाओगे,
संघर्ष हो ईमान संग सफल तभी हो पाओगे।।

                                         - अदित्य कुमार
                                            "बाल कवि"



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