कोशिश बेहतर बनने की

कर कोशिश बेहतर बनने की,
एक दिन तू बिल्कुल निखरेगा,
बस राह उचित चुन ओ राही,
मुश्किल से तू भी निकलेगा,

नदी किनारे बैठा राही,
फेंकेगा केवल पत्थर,
जो बिना रुके चलता जाए,
एक दिन वो छुएगा अंबर,

खड़ा हुआ है धरती पे,
धरती को गगन बनाना होगा,
हार गया एक बार अगर,
उस हार को कदम बनाना होगा,

हीरा सा बनना है यदि तो,
हीरे सा निखर सकेगा क्या,
अंधेरे में दिपक जला सके,
ऐसा जिगर रखेगा क्या,

बारूद तुझे बनना होगा,
पानी में आग लगाना है,
जब धरती तुझे पुकारेगी,
तुझको तलवार उठाना है,

इतिहास बनाने आया है,
तो कुछ तो करना ही होगा,
जीवन जीने कि ईक्षा है,
थोड़ा तो मरना ही होगा,

जिस दिन अंदर से टूट गया,
उस दिन तू कांच सा बिखरेगा,
कोशिश कर बेहतर बनने की,
एक दिन तू बिल्कुल निखरेगा।।

                              - अदित्य कुमार
                                  "बाल कवि"





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