लाल बहादुर शास्त्री
सदा ईमान ही परम धर्म है मान इसे अपनाया,
सत्ता हाथों में थी पर मन तब भी ना ललचाया,
राष्ट्र धर्म के आगे उन्होंने धर्म सभी ठुकराया,
देश प्रथम हो सभी क्षेत्र में हम सबको सिखलाया।
यदि ईमान बचा ना पाए क्या ही कहो बचाया?
इसी सोच को भारत के जन जन तक था पहुंचाया।
जनता की सेवा करने को हर सुविधा ठुकराया,
जैसे जनता जिएगी वो ही शैली अपनाया।
कसम दिया जा सकता है उस व्यक्ति के ईमान का,
खुद का भवन बना ना पाए, गद्दी था प्रधान का।
नाम था उनका लाल बहादुर सच में बड़े बहादुर थे,
जूठे और बेईमानों से जीवन भर लड़े बहादुर थे।
आधी रोटी खाया पर ना धमकी सही अमेरिका की,
लाख बड़े हो ताकत वाले उनकी औकात भी दिखला दी।
नमन है उस व्यक्तित्व को मेरा कोटि कोटि है प्रणाम,
लाल बहादुर शास्त्री जी को कभी ना भूले हिंदुस्तान।।
- आदित्य कुमार
(बाल कवि)
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