आजादी

आजादी
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चूम रहा आजाद तिरंगा झूम झूम कर आसमान को 
भारत की आजादी का पैगाम दे रहा इस जहान को

आओ चलो इस आजादी के पीछे का संघर्ष सुनो 
मोल है क्या इस आजादी का सारे भारतवर्ष सुनो

आजादी के लिए लड़े थे पृथ्वी राज चौहान कोई 
आजादी के लिए लड़े थे वीर टीपू सुल्तान कोई

आजादी के लिए कोई राणा प्रताप रण कर बैठा 
वन में घास की रोटी खाने का अंतिम प्रण कर बैठा 

कहीं स्वराज बनाने को एक वीर मराठा सजग हुआ 
सिंह की भांति वीर शिवाजी मुगल वंश पे गरज उठा

कहीं कोई झांसी की रानी मिट्टी की आजादी पे
अंतो-अंत तक लड़ी लड़ाई गोरों की आबादी से 

कोई भगत सिंह भरी जवानी में फांसी को चूम गया 
खुदीराम कोई बाल अवस्था में फंदे पे झूल गया 

किसी सुभाष ने द्वीप द्वीप जाकर सेना तैयार किया
“मातृभूमि आजाद करो” कह गोरों पे प्रहार किया 

बूढ़े गांधी बिना शस्त्र के बैठ जहां जाते खाली 
महज चंद आंदोलन कर अंग्रेजी नींव हिला डाली 

अन्य भी लाखों वीरों ने आजादी के संग्राम लड़े 
तभी तो हम भारतवासी है भारत में आजाद खड़े।

                – आदित्य कुमार 
                      (बाल कवि)

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