भूल गए पहलगाम?

खून से अब भी सनी हुई है पहलगाम की घाटी
कितने मां के दामन छूटे कई बहनों की राखी 

वक्त अभी कुछ खास न बीता रंग दिखा गई खादी 
कांप उठी जिस देश के आतंकी बंदूक से वादी

उसी देश के साथ क्रिकेट का मैच है रख डाला
क्या पाओगे पहन के बोलो खेल के जीत की माला 

बंद किया विमान बंद कर डाला है जब पानी
फिर क्या हर्ज था क्रिकेट का भी दे देते कुर्बानी 

कई निर्दोष मरे शहीद हुए कई वीर जवान 
देख रहे होंगे ऊपर से मैच विथ पाकिस्तान...

आज सियासत मेरे देश की कर गई है हद पार
इसी तरह होता है बोलो आतंकी पे वार?

शायद अब लगता है व्यर्थ था वीरों का बलिदान 
याद आ गया क्रिकेट मैच भूल गए पहलगाम.....

                 - आदित्य कुमार 
                     (बाल कवि)

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