गांधी की सच्चाई

गांधीवाद के तिलक का आज मैं चंदन करने आया हूं
गांधी जी पे आरोपों का खंडन करने आया हूं

पहला है आरोप लगा “इस भारत के बंटवारे का”
दूजा है आरोप “विरोधी इंकलाब के नारे का”

और तीसरा हिन्दू धर्म के साथ किया था गद्दारी 
आओ चलो इन आरोपों को खंड करें बारी बारी..

सन् सैंतालीस में देश बंटा 
था बंटा धर्म के नाम सुनो 
पर उस बंटवारे की सच्चाई 
खोल के अपने कान सुनो

तुम मान रहे हो बापू को दोषी इस हिन्द विभाजन का 
पर इस बंटवारे का असली कारण तो कोई और ही था

जिन्ना था सिद्धांत प्रदाता द्विराष्ट्र के नारे का
और समर्थन किया कवि इकबाल ने इस बंटवारे का

सबसे पहले शब्द दिया था रहमत अली ने पाकिस्तान
हिंदू महासभा ने भी बंटवारे का था किया ऐलान 

आरएसएस ने किया समर्थन, इन सबकी भूमिका महान 
इनके बंटवारे से ही बंट गया ये अपना हिंदुस्तान 

तो भारत के बंटवारे का नहीं आरोपी गांधी है
कुछ मूर्खों को छोड़ के बाकी सारी दुनिया जानती है।

अब दूजा आरोप “भगत सिंह को गांधी न बचा सके 
इसका मतलब इंकलाब के गांधी बड़े विरोधी है!”

अब ध्यान से सुनो सच्चाई
उस क्रांतिवीर के फांसी का 
वो शेर था जो खुद 
वीरगति को प्राप्ति का अभिलाषी था

गांधी महज चाहकर के भी बस इतना कर सकते थे 
राजनीति से जुड़े कैदियों के खातिर लड़ सकते थे 

मगर भगत सिंह पे धारा था अपराधों के अंतर्गत
और फांसी से बचने को थी माफी मांगने की जरूरत

हां ये सच है अगर भगत सिंह मांग जो लेते माफी तो 
यही था जरिया बचने का उस समय में जिसको फांसी हो

मगर भगत सिंह शेर थे और गोरे सारे गीदड़ थे 
शेर अगर झुक जाए तो हिम्मत बढ़ती है गीदड़ में 

और भगत सिंह इंकलाब के सबसे बड़े प्रणेता थे
इंकलाब ही झुक जाता जो अगर भगत सिंह झुक जाते 

इसलिए उस वीर ने अपनी फांसी को न रुकने दी
खुद की बलि चढ़ाई पर न शीश क्रांति की झुकने दी

और अगर फिर भी इस फांसी में तुमको संदेह लगे 
और तुम्हारा मन कहता है असली दोषी गांधी है 

जयगोपाल, कैलाशपति और सुना फणींद्र घोष कभी 
कभी सुना है हंसराज बोहरा, मनमोहन बनर्जी 

ये पांचों गद्दार थे जो अंग्रेजों के मुखबिर बने 
इनके दिए गवाही से ही फांसी क्रांतिवीर चढ़े 

इतने पर भी अगर तुम्हें दिखता है गांधी ही दोषी 
तो तुम बेवकूफ हो, है बुद्धि की तुममें खामोशी 

और आरोप तीसरा है 
गांधी के हिंदू होने पर 
पर शायद तुमको ज्ञात नहीं 
गांधी ही थे हिंदुत्व शिखर

वो सदी बीसवीं थी 
न कोई बड़ा गांधी से हिंदू था 
रामायण और महाभारत का 
गांधी केंद्रीय बिंदु था 

गीता के मार्गों का 
सच्चा अनुपालक गांधी जी थे 
और धर्म के मर्म की 
सच्चाई समझे गांधी ही थे 

मृत्यु के पल भी मुख से हे राम कहे जो महापुरुष
अब भी गांधी को न समझे, तुम हो कोई मुरख मानुष।

                     – आदित्य कुमार 
                           (बाल कवि)

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