बस लिखता रहूंगा

मुझे नहीं पता 
मैने कैसे लिखा 
बस मन किया 
तो मैने लिख दिया 
न छंदों का ज्ञान है न अलंकारों की समझ है 
हां, बस इतना है कि मेरे पास कलम है

मैं ये भी नहीं जानता क्या लिखना है 
और लिखने लगा तो नहीं जानता कहां रुकना है 
बस लिखता आया हूं लिख रहा हूं और लिखता रहूंगा 
पर कब तक? 
शायद खुद के अंत तक...

             – आदित्य कुमार 
                  (बाल कवि)

                  

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